एक दिवस

एक दिवस

एक दिवस

एक दिवस सगळे वाङमय
चोरीला जावो

प्रत्येकाच्या वाट्याला
कमीतकमी
एक कथा-एक कविता येवो

एके दिवशी जग उभे राहो
आपापल्या
हक्काच्या कवितांसोबत

आणि एक दिवस
अवघे जग
कवी होवो!

मराठी अनुवाद
भरत यादव
Bharat Yadav 

मूळ हिंदी कविता

एक दिन सारा साहित्य 
चोरी हो जाए। 

हर किसी के हिस्से 
कम से कम 
एक कथा-एक कविता आये। 

एक रोज़ दुनिया उठे 
अपने अपने 
हक़ की कविताओं के साथ। 

एक दिन पूरी दुनिया 
कवि हो जाए।। 

©किताबगंज
Kitabganj
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