स्त्रीचा देह

स्त्रीचा देह

स्त्रीचा देह

संस्कृतीची कितीक युद्धं
स्त्रीच्या देहावर लढली गेलीयत

कितीतरी संस्कृतींची इभ्रत
स्त्रियांच्या रक्ताने वाचवली गेली

इतिहासातले कितीक बदले
स्त्रियांवरील बलात्कारांनी पूर्ण झाले

कितीक तरी देशांचे झेंडे
रोवले गेलेत
स्त्रियांच्या योनीमध्ये.

मराठी अनुवाद
भरत यादव
Bharat Yadav 

मूळ हिंदी कविता

स्त्री की देह 

सभ्यता की कितनी जंगे 
स्त्री की देह पर लड़ी गयी

कितनी ही संस्कृतियों की इज्जत 
स्त्रियों के खून से बचायी गयी 

इतिहास के कितने बदले 
स्त्रियों के बलात्कार से पूरे हुए 

कितने ही देश के झंडे 
गाड़े गए
स्त्रियों की योनि में। 

©विहाग वैभव
Vihag Vaibhav 
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